قال الرئيس الأمريكي دونالد ترامب إنه يخطط لتوسيع حظر السفر إلى الولايات المتحدة ليشمل دولا أخرى، وذلك لمنع المزيد من الرعايا الأجانب من دخول الأراضي الأمريكية.
وبحسب الحظر الحالي الذي وقعه ترامب قبل عامين، فقد تم إغلاق الحدود الأمريكية أمام مواطني سبع دول، معظمها ذات غالبية مسلمة.
ويمنع القرار دخول مواطني (ليبيا وإيران والصومال وسوريا واليمن وكوريا الشمالية وفنزويلا) إلى الولايات المتحدة بأية طريقة سواء عبر الجو أو البحر أو من خلال الحدود البرية.
وبموجب خطط ترامب الجديدة، فمن المرجح إضافة بلدان أخرى إلى قائمة الحظر من أوروبا وأفريقيا وآسيا، بحسب وسائل إعلام أمريكية.
وأكد ترامب شخصيا وجود مثل هذه الخطط والسعي لمنع مواطني المزيد من الدول من الوصول إلى الولايات المتحدة.
وقال للصحفيين، في المنتدى الاقتصادي العالمي في دافوس بسويسرا، يوم الأربعاء "أنتم ترون ما يحدث في العالم، يجب أن تكون بلادنا آمنة".
ولم يقدم ترامب المزيد من التفاصيل حول الدول التي سيتم استهدافها أو عددها، لكنه قال إن المعلومات ستصدر "قريبا جدا".
وقد تشمل قائمة الحظر الموسعة، التي تحدثت عنها لأول مرة موقع بوليتيكو، دولا مثل بيلاروسيا وميانمار (بورما)، وإريتريا وقيرغيزستان ونيجيريا والسودان وتنزانيا.
وذكرت وسائل إعلام أمريكية أن الإدارة الأمريكية بحثت نسخا مختلفة من هذه القائمة طوال أسابيع.
تتزامن التقارير، التي تحدثت عن توسيع نطاق حظر السفر إلى أمريكا، مع الذكرى السنوية الثالثة لتوقيع ترامب قائمة الحظر الأولى.
ووقع ترامب القرار المثير للجدل بعد سبعة أيام من توليه منصبه كرئيس للولايات المتحدة في يناير/كانون الثاني 2017، واستبعد في البداية المسافرين من سبع دول ذات غالبية مسلمة.
وتم تعديل القائمة بعد سلسلة من الطعون القضائية، والآن تم منع بعض المواطنين (وليس كل المواطنين) من إيران وليبيا والصومال وسوريا واليمن وفنزويلا وكوريا الشمالية.
في يونيو/تموز 2018، أيدت المحكمة العليا قرار الحظر واعتبرته مطابقا للدستور الأمريكي، ورفضت أحكام المحاكم الأقل درجة والتي رأت أنه يتعارض مع الدستور.
وقال المتحدث باسم البيت الأبيض هوجان جيدلي، في بيان رسمي، إن الإدارة ليس لديها إعلانات جديدة مخططة تتعلق بالحظر. ووصف قرار الحظر السابق بأنه "ناجح بشكل كبير في حماية بلادنا وزيادة درجة الأمان في جميع أنحاء العالم".
ويقول جيدلي: "بحسب المنطق وقواعد الأمن القومي، فإنه إذا رغبت أي دولة في المشاركة الكاملة في برامج الهجرة الأمريكية، فيجب عليها أيضا الامتثال لجميع تدابير الأمن ومكافحة الإرهاب". "لأننا لا نريد دخول الإرهاب أو أي تهديد للأمن القومي إلى الولايات المتحدة."
ورد منتقدو الحظر بأن هجمات كبيرة مثل هجمات 11 سبتمبر/أيلول 2001 في نيويورك، وتفجير الماراثون في بوسطن وهجوم أورلاندو الليلي، نفذها رعايا دول ليست مدرجة على قائمة الحظر أو نفذها أشخاص ولدوا على الأراضي الأمريكية.
وعلى عكس القائمة الأولية، قد تشمل القائمة الجديدة دولا تربطها علاقة قوية بالولايات المتحدة. فنيجيريا، على سبيل المثال، شريك في مكافحة الإرهاب للولايات المتحدة.
Wednesday, January 22, 2020
Thursday, January 9, 2020
सेंसेक्स 635 अंक चढ़कर 41452 पर, निफ्टी 190 प्वाइंट ऊपर 12216 पर बंद
ऑस्ट्रेलिया में जंगल की आग थमने का नाम नहीं ले रही है.
ऑस्ट्रेलिया के कुछ इलाक़े बुरी तरह आग की चपेट में हैं और लाखों हेक्टयर इलाक़े इसे प्रभावित हुए हैं.
रिकॉर्ड तोड़ने वाला तापमान और महीनों का सूखा पूरे ऑस्ट्रेलिया में जंगल की आग का कारण बना है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
आग से निपटने की कोशिश कर रहे हज़ारों फायरफाइटर्स और वॉलिंटियर्स को बारिश ने थोड़ी राहत दी है लेकिन फिर भी ये आपदा का अंत नहीं है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
सितंबर से ऑस्ट्रेलिया के कई इलाक़ों में आग लगी है. पिछले हफ़्ते ये आग और तेज़ हुई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अब तक 24 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें तीन फायरफाइटर वॉलेंटियर्स भी शामिल हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके अलावा 63 लाख हेक्टेयर जंगल और पार्क आग में जल चुके हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्लयू) है. यहां लगभग 50 लाख हेक्टेयर इलाक़े में आग लग चुकी है और 1300 घर तबाह हो गए हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़कर शिविरों में जाना पड़ा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
ऑस्ट्रेलिया में आग फैलने का एक बड़ा कारण मौसम भी रहा है. गर्म, शुष्क मौसम के साथ तेज़ हवाएं आग के लिए बिल्कुल अनुकूल स्थितियां बना रही हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
सोमवार को न्यू साउथ वेल्स में 130 जगह आग लगी हुई थी. झाड़ियों वाले इलाक़े, जंगल से ढँके पर्वत और राष्ट्रीय पार्क सभी इसकी चपेट में आ गए थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
आग 40 डिग्री तापमान और तेज़ हवाओं के कारण और ज़्यादा भड़क गई. इससे आग बुझा रहे फायरफाइटर्स के लिए भी हालात और मुश्किल हो गए.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
न्यू साउथ वेल्स का छोटा सा शहर बालमोरल आग से सबसे ज़्यादा प्रभावित है. यहां 22 दिसंबर को आग के चलते कई घर नष्ट हो गए.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अब जनवरी आ जाने के बाद भी हालात ख़तरनाक बने हुए हैं और न्यू साउथ वेल्स में आपातकाल लागू हो गया है. यहां पर पार्क, जंगल के बीच रास्ते और कैंपिंग ग्राउंड बंद कर दिए गए हैं और छुट्टी बिताने आए लोगों को न्यू साउथ वेल्स तट के आसपास का 260 किमी का इलाक़ा ख़ाली करने के लिए कहा गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
सोमवार को कुछ बारिश हुई थी जिससे कुछ लोग अपने घरों में लौट सकते हैं और प्रभावित इलाक़ों में मदद पहुंचाई जा सकती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन, अधिकारियों ने आगाह किया है कि ख़तरा अभी टला नहीं है. आने वाले हफ़्ते में तापमान बढ़ सकता है और आग भड़क सकती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
विक्टोरिया राज्य में आठ लाख हेक्टेयर ज़मीन आग में जल चुकी है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
यहां नवंबर 2019 के अंत में शुरू हुई आग ने हाल के कुछ दिनों में ज़्यादा तबाही मचाई है. इसमें दो लोगों की जान जा चुकी है और ईस्ट गिप्सलैंड में 43 घर जल चुके हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मेलाकूटा शहर में रहने वाले लोग 31 दिसंबर को घर छोड़कर बीच पर चले गए थे. हवा की दिशा बदलने के कारण ही यहां आग बीच तक नहीं पहुंच पाई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
स्विस-आधारित समूह एयरविजुअल के अनुसार ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा प्रमुख वैश्विक शहरों में वायु गुणवत्ता के मामले में शुक्रवार को तीसरी सबसे ख़राब जगह पाई गई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
आगे मौसमे के तेज़ हवाओं, आंधी, बिजली गिरने से बेहद गर्म और शुष्क होने की आशंका है. इससे आग लगने का ख़तरा और बढ़ सकता है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
ऑस्ट्रेलिया में इस बार लगी आग आमतौर पर लगने वाली जंगल की आग से ज़्यादा विशाल है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
2019 में अमेज़न की जंगल की आग में न्यू साउथ वेल्स में क़रीब नौ लाख हेक्टेयर का नुक़सान हुआ था. 2018 में कैलिफॉर्निया की आग में आठ लाख हेक्टेयर का नुक़सान हुआ था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन, न्यू साउथ वेल्स की आग से प्रभावित ज़मीन का कुल क्षेत्र दक्षिण इंग्लैंड के अधिकांश हिस्से के बराबर होगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में पहले भी जंगल की आग फैलने की घटना होती रही है लेकिन इस बार की आग बेहद विशाल और ख़तरनाक है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
आग लगने के लिए कई बार लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है लेकिन अक्सर ये प्राकृतिक कारणों से भी होती है जैसे कि सूखी झाड़ियों पर बिजली गिरने से.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एक बार जब आग लग जाती है तो उसके आसपास के इलाक़े भी ख़तरे में आ जाते हैं. हवा के ज़रिए आग दूसरे इलाक़ों तक फैलती जाती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
आग से बनने वाला धुंआ बादलों में इकट्ठा होता है जिससे बिजली गिरने की स्थितियां बनती हैं. फिर बिजली गिरने से दूसरी जगह आग पकड़ जाती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
सितंबर 2019 में आग के चलते मारे गए लोगों की संख्या पिछले सालों के मुक़ाबले ज़्यादा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
फरवरी 2009 में ऑस्ट्रेलिया में लगी सबसे घातक आग को 'काला शनिवार' माना जाता है. इस आग में विक्टोरिया में 180 लोग मारे गए थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अगर आग के घरों और अन्य संपत्तियों तक पहुंचने का गंभीर ख़तरा होता है तो प्रशासन लोगों से समय रहते निकलने की अपील करता है, क्योंकि आग बहुत तेज़ी से फैलती है. उसके फैलने की गति कई लोगों के भागने की गति से भी तेज़ होती है. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
ऑस्ट्रेलिया के कुछ इलाक़े बुरी तरह आग की चपेट में हैं और लाखों हेक्टयर इलाक़े इसे प्रभावित हुए हैं.
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फरवरी 2009 में ऑस्ट्रेलिया में लगी सबसे घातक आग को 'काला शनिवार' माना जाता है. इस आग में विक्टोरिया में 180 लोग मारे गए थे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
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Tuesday, December 31, 2019
CAA विरोध प्रदर्शन: क्या दहशत में हैं यूपी के मुसलमान- ग्राउंड रिपोर्ट
नए नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शनों में उत्तर प्रदेश सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ा रहा है. 20 दिसंबर से विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से राज्य में 19 लोगों की जान चली गई.
बीबीसी संवाददाता विकास पांडे ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाक़ों में जाकर ये जानने की कोशिश की कि आख़िर राज्य में इतने बड़े स्तर पर हिंसक विरोध प्रदर्शन होने के पीछे वजहें क्या हैं और क्या दहशत में हैं यूपी के मुसलमान? मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कानपुर शहर में बापूपुरवा की संकरी गलियों से होते हुए मैं मोहम्मद शरीफ़ के घर पहुंचा.
वह एक टीन की छत वाले छोटे से घर के बाहर बैठे थे. ये सिर्फ़ एक कमरे का घर था जो दिन में रसोई और रात में सोने के कमरे के तौर पर इस्तेमाल होता है. वो उठे, मुझे गले लगाया और फिर फूट-फूट कर रोने लगे. कुछ मिनट इस गंभीर शांति में ही बीत गए. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
फिर अपने आंसू पोछते हुए उन्होंने कहा, "मैंने सबकुछ खो दिया. मैं जीना नहीं चाहता. मेरे बेटे की क्या ग़लती थी? पुलिस ने उसे गोली क्यों मारी?"
मोहम्मद शरीफ़ के 30 साल के बेटे मोहम्मद रईस की 23 दिसंबर को मौत हो गई थी. तीन दिन पहले उन्हें पेट में गोली लगी थी.
मोहम्मद शरीफ़ ने कहा, "मेरे बेटा विरोध प्रदर्शन नहीं कर रहा था. वो गलियों में सामान बेचता था और इत्तेफाक से उस जगह पर मौजूद था जहां प्रदर्शन हो रहे थे. लेकिन, अगर वो विरोध प्रदर्शन कर भी रहा होता तो क्या उसे मार देना चाहिए था?"
"क्या वो इसलिए मारा गया क्योंकि हम मुसलमान हैं? क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं? मैं मरने तक ये सवाल पूछता रहूंगा." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जहां पर मोहम्मद रईस को गोली मारी गई वहां पर दर्ज़नों लोग नागरिकता क़ानून का विरोध कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों के पत्थर फेंकने के बाद पुलिस से टकराव होने पर कुछ लोग हिंसक हो गए. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव में कम से कम 50 पुलिस अधिकारी चोटिल हो गए. हालांकि, पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग के आरोप लगे हैं.
नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों का कहना है कि ये नया क़ानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम आप्रवासियों को सुरक्षा प्रदान करता है. हालांकि, सरकार का कहना है कि वो इस क़ानून के ज़रिए अपने देश में उत्पीड़न झेल चुके धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बार-बार ज़ोर देकर कह रहे हैं कि ये मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं है.
लेकिन, चार करोड़ से भी ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाले उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन जारी हैं.
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने वालों से 'बदला' लिया जाएगा. उन्होंने कहा था, "सार्वजनिक संपत्ति के नुक़सान की भरपाई के लिए जिम्मेदार लोगों की संपत्ति जब्त की जाएगी." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
पुलिस ने उनके आदेश पर ऐसे लोगों की पहचान की और पूरे कानपुर में उनके पोस्टर लगा दिए.
इससे समुदाय में डर पैदा हो गया. मैं बापूपुरवा में कई महिलाओं से मिला जिन्होंने कहा कि उनके बेटों (कुछ 10 साल के भी) और पतियों ने गिरफ़्तारी और प्रताड़ना के डर से दूसरे शहरों में जाने का फ़ैसला किया है.
कानपुर में मुस्लिम समुदाय के नेता नसीरुद्दीन ने बताया, "एनआरसी में लोगों को ये साबित करना होगा कि वो भारत के नागरिक हैं. मान लीजिए की एक हिंदू परिवार और एक मुस्लिम परिवार अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता. ऐसे में हिंदू परिवार सीएए के ज़रिए नागरिकता के लिए दावा कर सकता है लेकिन मुस्लिम परिवार के पास ये विकल्प नहीं है."
वहीं, सरकार कहती है कि एनआरसी को जल्द ही लागू करने की उसकी कोई योजना नहीं है लेकिन मुस्लिम समुदाय में फिर भी डर है कि अगर वो अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए तो क्या होगा.
नसीरुद्दीन कहते हैं कि मुस्लिमों मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहमें इसलिए भी डर है क्योंकि उन्हें सत्ताधारी हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा नहीं है.
पहचान छुपाने की शर्त पर एक महिला ने कहा, "हमारी क्या ग़लती है? हम एक लोकतंत्र में हैं और किसी बात से सहमत न होने पर हमें विरोध करने का हर अधिकार है. लेकिन, हमारे रक्षक ही भक्षक बन गए हैं. अब हम कहां जाएं?"
जब मैं अलग-अलग सड़कों से गुज़रा तो स्थितियां एक जैसी थीं, बहुत कम लड़के बाहर थे लेकिन महिलाएं आपस में बातें कर रही थीं. ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी के उनसे सवाल पूछने का इंतज़ार कर रही हैं.
नाम न बताने की शर्त पर एक और महिला ने बताया, "रात को पुलिसवाले हमारे घर पर आए थे और उन्होंने कहा था कि वो सभी मर्दों को गिरफ़्तार करेंगे. उन्होंने हमें उन लोगों की पहचान करने के लिए कहा जो विरोध प्रदर्शन कर रहे थे."
मुस्लिम समुदाय में डरने का एक कारण योगी आदित्यनाथ के पुराने मुसलमान विरोधी बयान भी हैं. जैसे डोनल्ड ट्रंप की तरह भारत में मुस्लिमों पर यात्रा प्रतिबंध की वक़ालत करना, मुस्लिम पुरुषों पर हिंदू महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगाना या फिर अभिनेता शाहरुख ख़ान की पाकिस्तान आधारित चरमपंथी हाफिज़ सईद से तुलना करना.
कई लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री पीएम नरेंद्र मोदी के ''हिंदू राष्ट्रवाद'' के विचार पर चल रहे हैं.
नसीरुद्दीन कहते हैं, "उत्तर प्रदेश इस विचारधारा की मुख्य प्रयोगशाला बन गया है."
राज्य में हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनमें से अधिकतर मुसलमान पुरुष हैं. साथ ही कई दिनों के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी गई थी. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कई प्रमुख एक्टिविस्ट को भी हिरासत में लिया गया है जिनमें एक बड़े पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं.
पुलिस पर भी मुसलमानों को प्रताड़ित करने का आरोप है. कानपुर में वीडियो के ज़रिए ये सामने आया है कि पुलिसकर्मी मुस्लिम बहुल इलाक़ों में देर रात कारों और घरों को कथित रूप से तोड़ रहे हैं. मेरे सहकर्मियों ने राज्य के दूसरे इलाक़ों में भी ऐसे ही दावे किए जाने की ख़बरें दी हैं.
बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये को बताया गया था कि पुलिस ने मुजफ़्फ़रनगर में कई जगहों पर मुसलमानों के घरों में कथित रूप से तोड़फोड़ की थी. यह इलाक़ा कानपुर से 580 किमी. दूर है. एक घर में उन्होंने टीवी, फ्रिज और रसोई के बर्तन कथित तौर पर सबकुछ तोड़ दिया.
योगिता लिमये ने रिपोर्ट की थी, "मैं उन युवकों से मिली, जिन्होंने बताया कि उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था और पिटाई की थी." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी हिंदी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और बिजनौर में पुलिस की क्रूरता के आरोपों पर रिपोर्ट की थी.
इन इलाक़ों में आठ लोगों की गोली लगने से मौत हो गई. उनके परिवारों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें गोली मारी. हालांकि, पुलिस इन आरोपों से इनकार करती है.
अगर आप इन सभी कहानियों को सुनते हैं तो एक पैटर्न उभरकर आता है- हिरासत और फिर मुस्लिम बहुल इलाक़ों में रात को कारें और घरों में तोड़फोड़.
लेकिन, क़ानून व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है.
उत्तर प्रदेश में एडीजी क़ानून व्यवस्था पीवी रामा शास्त्री ने बीबीसी को बताया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने वालों की 'डिजीटल सबूतों' के आधार पर पहचान करके उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा.
जब मैंने उनसे पूछा की पुलिस वीडियो के आधार पर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने की जल्दी में है लेकिन अपने अधिकारियों पर नहीं, ऐसा क्यों? मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हर कोई आरोप लगाने के लिए स्वतंत्र है."
एडीजी पीवी रामा शास्त्री ने पुलिस के तोड़फोड़ करने की बात से भी इनकार किया. जब मैंने उन्हें तोड़फोड़ की घटनाओं का वीडियो दिखाया तो उन्होंने कहा, "ये वीडियो ऐसे ही कहीं पोस्ट किया गया है, ये अपने में पूरा नहीं है." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उन्होंने कहा, "घटना की जगह और संदर्भ के बारे में स्पष्ट रूप से बताना होगा. किसी एक वीडियो के आधार पर फ़ैसला नहीं लिया जा सकता." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एडीजी ने राज्य में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई 19 मौतों में भी पुलिस के शामिल होने से इनकार कर दिया और कहा कि इस मामले में जांच जारी है. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन, सामाजिक कार्यकर्ता सौम्या राणा ने कहा कि पुलिस की जिम्मदारी तय करने की ज़रूरत है.
सौम्या राणा कहती हैं, "हिंसा किसी चीज़ का हल नहीं है लेकिन ये बात दोनों तरफ़ लागू होती है. पुलिस को हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना क्या एकमात्र रास्ता है?" मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"कई लोगों की जान चली गई. हम इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं."
मैंने ग्राउंड पर काम करने वाले कुछ पुलिसकर्मियों से बात की तो उनमें से कुछ ने बताया कि वो बहुत दबाव में काम कर रहे थे. पहचान छुपाने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने कहा कि उन्हें 'किसी भी कीमत पर विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित' करने के आदेश मिले थे. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी संवाददाता विकास पांडे ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाक़ों में जाकर ये जानने की कोशिश की कि आख़िर राज्य में इतने बड़े स्तर पर हिंसक विरोध प्रदर्शन होने के पीछे वजहें क्या हैं और क्या दहशत में हैं यूपी के मुसलमान? मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कानपुर शहर में बापूपुरवा की संकरी गलियों से होते हुए मैं मोहम्मद शरीफ़ के घर पहुंचा.
वह एक टीन की छत वाले छोटे से घर के बाहर बैठे थे. ये सिर्फ़ एक कमरे का घर था जो दिन में रसोई और रात में सोने के कमरे के तौर पर इस्तेमाल होता है. वो उठे, मुझे गले लगाया और फिर फूट-फूट कर रोने लगे. कुछ मिनट इस गंभीर शांति में ही बीत गए. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
फिर अपने आंसू पोछते हुए उन्होंने कहा, "मैंने सबकुछ खो दिया. मैं जीना नहीं चाहता. मेरे बेटे की क्या ग़लती थी? पुलिस ने उसे गोली क्यों मारी?"
मोहम्मद शरीफ़ के 30 साल के बेटे मोहम्मद रईस की 23 दिसंबर को मौत हो गई थी. तीन दिन पहले उन्हें पेट में गोली लगी थी.
मोहम्मद शरीफ़ ने कहा, "मेरे बेटा विरोध प्रदर्शन नहीं कर रहा था. वो गलियों में सामान बेचता था और इत्तेफाक से उस जगह पर मौजूद था जहां प्रदर्शन हो रहे थे. लेकिन, अगर वो विरोध प्रदर्शन कर भी रहा होता तो क्या उसे मार देना चाहिए था?"
"क्या वो इसलिए मारा गया क्योंकि हम मुसलमान हैं? क्या हम इस देश के नागरिक नहीं हैं? मैं मरने तक ये सवाल पूछता रहूंगा." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जहां पर मोहम्मद रईस को गोली मारी गई वहां पर दर्ज़नों लोग नागरिकता क़ानून का विरोध कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों के पत्थर फेंकने के बाद पुलिस से टकराव होने पर कुछ लोग हिंसक हो गए. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव में कम से कम 50 पुलिस अधिकारी चोटिल हो गए. हालांकि, पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग के आरोप लगे हैं.
नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों का कहना है कि ये नया क़ानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम आप्रवासियों को सुरक्षा प्रदान करता है. हालांकि, सरकार का कहना है कि वो इस क़ानून के ज़रिए अपने देश में उत्पीड़न झेल चुके धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बार-बार ज़ोर देकर कह रहे हैं कि ये मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं है.
लेकिन, चार करोड़ से भी ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाले उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन जारी हैं.
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने वालों से 'बदला' लिया जाएगा. उन्होंने कहा था, "सार्वजनिक संपत्ति के नुक़सान की भरपाई के लिए जिम्मेदार लोगों की संपत्ति जब्त की जाएगी." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
पुलिस ने उनके आदेश पर ऐसे लोगों की पहचान की और पूरे कानपुर में उनके पोस्टर लगा दिए.
इससे समुदाय में डर पैदा हो गया. मैं बापूपुरवा में कई महिलाओं से मिला जिन्होंने कहा कि उनके बेटों (कुछ 10 साल के भी) और पतियों ने गिरफ़्तारी और प्रताड़ना के डर से दूसरे शहरों में जाने का फ़ैसला किया है.
कानपुर में मुस्लिम समुदाय के नेता नसीरुद्दीन ने बताया, "एनआरसी में लोगों को ये साबित करना होगा कि वो भारत के नागरिक हैं. मान लीजिए की एक हिंदू परिवार और एक मुस्लिम परिवार अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता. ऐसे में हिंदू परिवार सीएए के ज़रिए नागरिकता के लिए दावा कर सकता है लेकिन मुस्लिम परिवार के पास ये विकल्प नहीं है."
वहीं, सरकार कहती है कि एनआरसी को जल्द ही लागू करने की उसकी कोई योजना नहीं है लेकिन मुस्लिम समुदाय में फिर भी डर है कि अगर वो अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए तो क्या होगा.
नसीरुद्दीन कहते हैं कि मुस्लिमों मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रहमें इसलिए भी डर है क्योंकि उन्हें सत्ताधारी हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा नहीं है.
पहचान छुपाने की शर्त पर एक महिला ने कहा, "हमारी क्या ग़लती है? हम एक लोकतंत्र में हैं और किसी बात से सहमत न होने पर हमें विरोध करने का हर अधिकार है. लेकिन, हमारे रक्षक ही भक्षक बन गए हैं. अब हम कहां जाएं?"
जब मैं अलग-अलग सड़कों से गुज़रा तो स्थितियां एक जैसी थीं, बहुत कम लड़के बाहर थे लेकिन महिलाएं आपस में बातें कर रही थीं. ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी के उनसे सवाल पूछने का इंतज़ार कर रही हैं.
नाम न बताने की शर्त पर एक और महिला ने बताया, "रात को पुलिसवाले हमारे घर पर आए थे और उन्होंने कहा था कि वो सभी मर्दों को गिरफ़्तार करेंगे. उन्होंने हमें उन लोगों की पहचान करने के लिए कहा जो विरोध प्रदर्शन कर रहे थे."
मुस्लिम समुदाय में डरने का एक कारण योगी आदित्यनाथ के पुराने मुसलमान विरोधी बयान भी हैं. जैसे डोनल्ड ट्रंप की तरह भारत में मुस्लिमों पर यात्रा प्रतिबंध की वक़ालत करना, मुस्लिम पुरुषों पर हिंदू महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोप लगाना या फिर अभिनेता शाहरुख ख़ान की पाकिस्तान आधारित चरमपंथी हाफिज़ सईद से तुलना करना.
कई लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री पीएम नरेंद्र मोदी के ''हिंदू राष्ट्रवाद'' के विचार पर चल रहे हैं.
नसीरुद्दीन कहते हैं, "उत्तर प्रदेश इस विचारधारा की मुख्य प्रयोगशाला बन गया है."
राज्य में हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनमें से अधिकतर मुसलमान पुरुष हैं. साथ ही कई दिनों के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक लगा दी गई थी. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कई प्रमुख एक्टिविस्ट को भी हिरासत में लिया गया है जिनमें एक बड़े पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं.
पुलिस पर भी मुसलमानों को प्रताड़ित करने का आरोप है. कानपुर में वीडियो के ज़रिए ये सामने आया है कि पुलिसकर्मी मुस्लिम बहुल इलाक़ों में देर रात कारों और घरों को कथित रूप से तोड़ रहे हैं. मेरे सहकर्मियों ने राज्य के दूसरे इलाक़ों में भी ऐसे ही दावे किए जाने की ख़बरें दी हैं.
बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये को बताया गया था कि पुलिस ने मुजफ़्फ़रनगर में कई जगहों पर मुसलमानों के घरों में कथित रूप से तोड़फोड़ की थी. यह इलाक़ा कानपुर से 580 किमी. दूर है. एक घर में उन्होंने टीवी, फ्रिज और रसोई के बर्तन कथित तौर पर सबकुछ तोड़ दिया.
योगिता लिमये ने रिपोर्ट की थी, "मैं उन युवकों से मिली, जिन्होंने बताया कि उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था और पिटाई की थी." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
बीबीसी हिंदी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और बिजनौर में पुलिस की क्रूरता के आरोपों पर रिपोर्ट की थी.
इन इलाक़ों में आठ लोगों की गोली लगने से मौत हो गई. उनके परिवारों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें गोली मारी. हालांकि, पुलिस इन आरोपों से इनकार करती है.
अगर आप इन सभी कहानियों को सुनते हैं तो एक पैटर्न उभरकर आता है- हिरासत और फिर मुस्लिम बहुल इलाक़ों में रात को कारें और घरों में तोड़फोड़.
लेकिन, क़ानून व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदार राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है.
उत्तर प्रदेश में एडीजी क़ानून व्यवस्था पीवी रामा शास्त्री ने बीबीसी को बताया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने वालों की 'डिजीटल सबूतों' के आधार पर पहचान करके उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा.
जब मैंने उनसे पूछा की पुलिस वीडियो के आधार पर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने की जल्दी में है लेकिन अपने अधिकारियों पर नहीं, ऐसा क्यों? मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके जवाब में उन्होंने कहा, "हर कोई आरोप लगाने के लिए स्वतंत्र है."
एडीजी पीवी रामा शास्त्री ने पुलिस के तोड़फोड़ करने की बात से भी इनकार किया. जब मैंने उन्हें तोड़फोड़ की घटनाओं का वीडियो दिखाया तो उन्होंने कहा, "ये वीडियो ऐसे ही कहीं पोस्ट किया गया है, ये अपने में पूरा नहीं है." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उन्होंने कहा, "घटना की जगह और संदर्भ के बारे में स्पष्ट रूप से बताना होगा. किसी एक वीडियो के आधार पर फ़ैसला नहीं लिया जा सकता." मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एडीजी ने राज्य में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई 19 मौतों में भी पुलिस के शामिल होने से इनकार कर दिया और कहा कि इस मामले में जांच जारी है. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
लेकिन, सामाजिक कार्यकर्ता सौम्या राणा ने कहा कि पुलिस की जिम्मदारी तय करने की ज़रूरत है.
सौम्या राणा कहती हैं, "हिंसा किसी चीज़ का हल नहीं है लेकिन ये बात दोनों तरफ़ लागू होती है. पुलिस को हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना क्या एकमात्र रास्ता है?" मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
"कई लोगों की जान चली गई. हम इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं."
मैंने ग्राउंड पर काम करने वाले कुछ पुलिसकर्मियों से बात की तो उनमें से कुछ ने बताया कि वो बहुत दबाव में काम कर रहे थे. पहचान छुपाने की शर्त पर एक पुलिसकर्मी ने कहा कि उन्हें 'किसी भी कीमत पर विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित' करने के आदेश मिले थे. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
Thursday, December 12, 2019
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी आरामको की शेयर बाज़ार में धमाकेदार एंट्री: प्रेस रिव्यू
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़ दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी आरामको अपनी बहुप्रतीक्षित सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के साथ बाज़ार में उतरने के बाद बुधवार को शेयर मार्केट में सूचीबद्ध हुई.
आरामको का आईपीओ अपने इश्यू प्राइस के मुक़ाबले 10 फ़ीसदी प्रीमियम के साथ 35.20 रियाल (664.13 रुपए) पर लिस्ट हुआ.
इस आईपीओ के 25.60 अरब डॉलर (करीब 1834 अरब रुपए) की रक़म जुटाने की उम्मीद थी लेकिन आरामको ने 25.60 अरब डॉलर जुटाए.
यानी आईपीओ के सूचीबद्ध होने के साथ ही रकम जुटाने के मामले में इसने साल 2014 में न्यूयॉर्क में लिस्ट हुई अलीबाबा को (25 अरब डॉलर) भी पीछे छोड़ दिया है.
सऊदी आरामको ने टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ऐपल को भी मार्केट कैपिटल के लिहाज से पछाड़ दिया है.
आईपीओ की लिस्टिंग के बाद कंपनी की कुल पूंजी बढ़कर लगभग 1.88 ट्रिलयन डॉलर हो चुकी है. ये ऐपल की बाज़ार पूंजी 1.2 ट्रिलियन डॉलर से कहीं ज़्यादा है.
नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार 16 वर्षीय स्वीडिश छात्रा ग्रेटा थनबर्ग को टाइम्स मैगज़ीन, 2019 पर्सन ऑफ़ द इयर नामित किया गया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण से दुनियाभर के नेताओं का ध्यान खींचा था. उनका 'हाउ डेयर यू' भाषण काफी सुर्खियों में रहा था जो उन्होंने यूएन में दिया था.
जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई की मांग करके वैश्विक स्तर पर इस आंदोलन की शुरुआत करने वाली थनबर्ग इस पुरस्कार को पाने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं.
ग्रेटा ने महज एक साल के भीतर ही जलवायु के मुद्दे पर अभियानों की वजह से अपनी पहचान बनाई है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, अयोध्या मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी.
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में 9 नवंबर के फ़ैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ गुरुवार को चैंबर में याचिकाओं की सुनवाई करेगी.
शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था और मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक पांच एकड़ ज़मीन आबंटित की थी.
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण, एस अब्दुल नजीर, और संजीव खन्ना की पीठ इस बात पर सुनवाई करेगी कि 18 याचिकाओं की सुनवाई खुली अदालत में हो या नहीं. पहले इस बेंच की अगुवाई करने वाले चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर हो चुके हैं. जस्टिस संजीव खन्ना ने उनकी जगह ली है.
दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने को लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने छात्रों और दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ अवमानना याचिका दायर की है.
जेएनयू प्रशासन का कहना कि आदेश का उल्लंघन करके 28 अक्तूबर से विश्वविद्यालय के दिन प्रतिदिन के काम में बाधा पहुंचाई जा रही है.
पुलिस अदालत के आदेश का अनुपालन कराने में नाकाम रही है और उसने क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देकर ऐसा करने से इनकार भी किया है.
आरामको का आईपीओ अपने इश्यू प्राइस के मुक़ाबले 10 फ़ीसदी प्रीमियम के साथ 35.20 रियाल (664.13 रुपए) पर लिस्ट हुआ.
इस आईपीओ के 25.60 अरब डॉलर (करीब 1834 अरब रुपए) की रक़म जुटाने की उम्मीद थी लेकिन आरामको ने 25.60 अरब डॉलर जुटाए.
यानी आईपीओ के सूचीबद्ध होने के साथ ही रकम जुटाने के मामले में इसने साल 2014 में न्यूयॉर्क में लिस्ट हुई अलीबाबा को (25 अरब डॉलर) भी पीछे छोड़ दिया है.
सऊदी आरामको ने टेक्नोलॉजी क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ऐपल को भी मार्केट कैपिटल के लिहाज से पछाड़ दिया है.
आईपीओ की लिस्टिंग के बाद कंपनी की कुल पूंजी बढ़कर लगभग 1.88 ट्रिलयन डॉलर हो चुकी है. ये ऐपल की बाज़ार पूंजी 1.2 ट्रिलियन डॉलर से कहीं ज़्यादा है.
नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार 16 वर्षीय स्वीडिश छात्रा ग्रेटा थनबर्ग को टाइम्स मैगज़ीन, 2019 पर्सन ऑफ़ द इयर नामित किया गया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण से दुनियाभर के नेताओं का ध्यान खींचा था. उनका 'हाउ डेयर यू' भाषण काफी सुर्खियों में रहा था जो उन्होंने यूएन में दिया था.
जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई की मांग करके वैश्विक स्तर पर इस आंदोलन की शुरुआत करने वाली थनबर्ग इस पुरस्कार को पाने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं.
ग्रेटा ने महज एक साल के भीतर ही जलवायु के मुद्दे पर अभियानों की वजह से अपनी पहचान बनाई है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, अयोध्या मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी.
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में 9 नवंबर के फ़ैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ गुरुवार को चैंबर में याचिकाओं की सुनवाई करेगी.
शीर्ष अदालत ने विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था और मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक पांच एकड़ ज़मीन आबंटित की थी.
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण, एस अब्दुल नजीर, और संजीव खन्ना की पीठ इस बात पर सुनवाई करेगी कि 18 याचिकाओं की सुनवाई खुली अदालत में हो या नहीं. पहले इस बेंच की अगुवाई करने वाले चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर हो चुके हैं. जस्टिस संजीव खन्ना ने उनकी जगह ली है.
दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने को लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने छात्रों और दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ अवमानना याचिका दायर की है.
जेएनयू प्रशासन का कहना कि आदेश का उल्लंघन करके 28 अक्तूबर से विश्वविद्यालय के दिन प्रतिदिन के काम में बाधा पहुंचाई जा रही है.
पुलिस अदालत के आदेश का अनुपालन कराने में नाकाम रही है और उसने क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देकर ऐसा करने से इनकार भी किया है.
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